रौशनी की तलाश में भटकता मन अंतस गिरते-उठते ज्वार सा आवेग करते अतिक्रमण, रौशनी की तलाश में भटकता मन अंतस गिरते-उठते ज्वार सा आवेग करते अतिक्रमण,
वैसे पूरे विश्व में घुमघुम कर हिंदी का रूप और छवि निखरता है! वैसे पूरे विश्व में घुमघुम कर हिंदी का रूप और छवि निखरता है!
वो एक तन्हा इस गगन में, तुझ जैसा और कौन? हरियाली है चारो तरफ़ पर, तुझसे सुना और कौ वो एक तन्हा इस गगन में, तुझ जैसा और कौन? हरियाली है चारो तरफ़ पर, तुझ...
जलाकर अपना कलेजा बाहों में चाय भरता है.! इस दौर में कुल्हड़ जैसा इश्क भी भला कौन करता ह जलाकर अपना कलेजा बाहों में चाय भरता है.! इस दौर में कुल्हड़ जैसा इश्क भी भला क...
वह अटल नेता कवि कहाँ लाऊं? वह अटल नेता कवि कहाँ लाऊं?
क्या कहूँ दस्तूर ही है कुछ ऐसा ज़माने का ख़ुद पर यक़ीन ही प्रमाण है जीत का।। क्या कहूँ दस्तूर ही है कुछ ऐसा ज़माने का ख़ुद पर यक़ीन ही प्रमाण है जीत का।।